आवश्यकता-पदानुक्रम सिद्धान्त | Exigency Hierarchy Theory
• अब्राहम मास्लो एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे। मास्लों के अनुसार, आवश्यकताओं के कई स्तर होते हैं जिन्हें व्यक्तिगत पूर्णता के उच्चतम स्तर तक पहुँचने के लिए एक व्यक्ति को पूरा करने का प्रत्यन्त करना पड़ता है। इस प्रकार एक व्यक्ति को सबसे निचले स्तर पर अपनी प्राथमिक (शारीरिक) आवश्यकताओं को पूरा करने योग्य होना चाहिए। जब एक बार ये आवश्यकताएँ पूरी हो जाती हैं तब सुरक्षा महत्त्वपूर्ण हो जाती है। तत्पश्चात् किसी से जुड़े होने की आवश्यकता और स्नेह करने और स्नेह करवाने की आवश्यकता आती है।
• किसी समूह से जुड़े होने की इच्छा जैसे परिवार, मित्र और धार्मिक संगठन, हमें स्नेह किए जाने का और दूसरों द्वारा स्वीकार किए जाने का अनुभव कराते हैं। जब हम ऊपर दी गई आवश्यकताओं को सफलता से सन्तुष्ट होते हैं तब हम आत्म-सम्मान, आत्मविश्वास और आत्म-मूल्य जैसी आवश्यकताओं को पूरा करना चाहते हैं। अगली आवश्यकता ज्ञान और अनुभव सम्बन्धी आवश्यकताएँ हैं, जो अपने ज्ञान और समझ को समाहित करती हैं; तत्पश्चात् आज्ञा और सुन्दरता की आवश्यकता आती है। अन्ततः एक व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता तक पहुँच जाता है जिसे हम आत्मसिद्धि कहते हैं। इस प्रकार के व्यक्ति में आत्मज्ञान की विशेषताएँ होती हैं, ऐसा व्यक्ति समाज के प्रति जिम्मेदार होता है और जीवन की सभी चुनौतियों के लिए तैयार होता है।
• आवश्यकताओं की उपरोक्त सूची को पदानुक्रम या श्रृंखलाओं की पंक्ति कहते हैं।
अभिप्रेरणा एवं अधिगम | CTET और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
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मास्लो द्वारा प्रतिपादित आवश्यकताओं का पदानुक्रम :-
• जैसे-जैसे जीवन बीतता है व्यक्ति समझदारी और ज्ञान प्राप्त करता जाता है और वह सीखता है कि कैसे परिस्थितियों का सामना करें। इस प्रकार वह पदानुक्रम या सीढ़ी पर ऊपर की ओर चढ़ता जाता है। व्यक्ति किस परिस्थिति का सामना कर रहा है? यह प्रश्न इस बात का निर्धारण करता है कि व्यक्ति पदानुक्रम पर ऊपर चढ़ता है या नीचे आता है।
• यह पदानुक्रम बहुत-सी संस्कृतियों के लिए सत्य नहीं है। यह पाया गया है कि कुछ देशों जैसे- स्वीडन और नार्वे में उच्च जीवन शैली बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं और आत्मसिद्धि से ज्यादा सामाजिक आवश्यकताएँ महत्त्वपूर्ण हैं।
• कुछ संस्कृतियों में आत्मसिद्धि की आवश्यकता से सुरक्षा की आवश्यकता ज्यादा प्रबल है इसी तरह काम की सन्तुष्टि से ज्यादा नौकरी की सुरक्षा का महत्त्व है।

