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Gender Issues in Social Construction | सामाजिक निर्माण में लैंगिक मुद्दे #ctet #ctetsuccess #eductet #cdp #pedagogy #ctet2022

 सामाजिक निर्माण लैंगिक मुद्दे (Gender Issues in Social Construction) 

सामाजिक रचना के रूप में लिंग की भूमिका 

समाज की रचना में स्त्री व पुरुष दोनों की भूमिका है। किसी एकमात्र से समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। प्राचीन काल में कभी स्त्री को बहुत महत्त्व दिया जाता था, परंतु समय के बदलाव ने पैतृक समाज को जन्म दिया। स्त्री हो या पुरुष दोनों में शारीरिक भिन्नताएँ तो हैं, परंतु श्रेष्ठता की कल्पना महज एक भ्रम है। सामाजिक निर्माण में लैंगिक मुद्दे में हम समाज के रचना में रचना में इस भूमिका को समझेंगे। 
आज बदली परिस्थितियों में महिलाएँ भी हर क्षेत्र में अपना नाम कर रही हैं तथा कई क्षेत्रों में पुरुषों से काफी आगे भी निकल चुकी है। चूँकि समाज के दोनों आवश्यक अंग हैं ऐसे में किसी भी प्रकार की श्रेष्ठता की बात करना गलत होगा और साथ ही समाज को स्त्री व पुरुष में बाँटना गलत होगा। कभी धर्म, कभी जाति, कभी नस्ल आखिर हम लोग कब तक बँटते रहेंगे? एक उत्कृष समाज के निर्माण में लोगो को लैंगिक मुद्दे  छोड़ना ही होगा।

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पूर्वाग्रह 

पूर्वाग्रह बिना किसी तथ्य के या  तर्क के आधार पर किसी के प्रति धारणा बना लेना। इसका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं होता है। यह एक तरह की मनोवृति ही है जो व्यक्ति को किसी समूह या उसके सदस्य के प्रति अनुकूल या प्रतिकूल ढंग से सोचने, प्रत्यक्षण करने अनुभव करने तथा कोई क्रिया करने के लिए पहले से तत्पर बना देती है।
उदाहरण-‘लड़कियां गणित में अधिक अफसल होती हैं। या ‘लड़कियाँ अच्छा गाना गाती हैं लड़कों की अपेक्षा’। इसमें दोनों उदाहरण पूर्वाग्रह को दर्शाते हैं। पूर्वाग्रह का संबंध पक्षपात से है। यह जाति, धर्म, लिंग, समाज, क्षेत्र आदि पर आधारित हो सकता है।
शिक्षक को या विद्द्यालय प्रबंधन को किसी भी पक्षपात पूर्ण व्यवहार तथा पूर्वाग्रह से बचना चाहिए साथ ही बच्चो को भी इनसे बचाना चाहिए। 


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  • पूर्वाग्रह विवेकहीन होते हैं।
  • पूर्वाग्रह अर्जित होते हैं।
  • पूर्वाग्रह पूर्ण रूप से किसी समूह द्वारा संचालित होते हैं।
  • पूर्वाग्रह का संबंध वास्तविकता से नहीं होते हैं।
  • पूर्वाग्रह दृढ़ तथा स्थिर प्रवृत्ति के होते हैं।
  • पूर्वाग्रह संवेगात्मकता से प्रभावित होते हैं।

मनोवृति  या  अभिवृति अभिवृति 

  • मनोवृत्ति का संबंध किसी विषय, धारणा या विचार से होता है। 
  • मनोवृत्ति संज्ञानात्मक, भावात्मक, व्यवहारात्मक संगठन का एक संगठित तंत्र है। 
  • मनोवृत्ति सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों होती है। 
  • मनोवृत्ति में इन तीनों संघटकों की कुछ खास-खास विशेषताएँ होती हैं। 
  • मनोवृत्ति सीखी जाती है। मनोवृत्ति अपेक्षाकृत स्थायी होती है (परिवर्तन संभव है)। 
  • इसमें परिवर्तन संगत और असंगत दोनों रूपों में होते हैं। 
  • मनोवृत्ति में प्रेरणात्मक गुण होते हैं इसलिए विशिष्ट दिशा में निर्देशित होती है। 

मनोवृति  और  पूर्वाग्रह  में अंतर CTET SUCCESS

  • मनोवृत्ति में परिवर्तन अपेक्षाकृत आसान है जबकि पूर्वाग्रह में परिवर्तन आसान नहीं है। 
  • मनोवृत्ति के निर्माण में मूलभूत बातें छिपी होती है जबकि पूर्वाग्रह में ऐसा नहीं होता है। 
  • मनोवृत्ति व्यक्तिगत होती है तथा पूर्वाग्रह सामाजिक या समूह निहित होती है। 
  • मनोवृत्ति सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में पायी जाती है जबकि पूर्वाग्रह अधिकांश नकारात्मक भावों को रखता है।

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