Class 6 History 10: अध्याय 10: “भवन, चित्रकला और पुस्तकें”
Class 6 History 10 : प्राचीन भारतीय इतिहास में कला, संस्कृति, और साहित्य का विशेष स्थान रहा है। इस अध्याय में हम प्राचीन भारत की प्रमुख कला शैलियों, भवन निर्माण, चित्रकला और साहित्यिक कृतियों के बारे में जानेंगे। यह अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि किस प्रकार प्राचीन भारतीय समाज ने अपनी सभ्यता, संस्कृति और विचारों को चित्रित किया और संरक्षित किया। भवन निर्माण और चित्रकला के माध्यम से समाज ने अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सोच को व्यक्त किया, जबकि पुस्तकों और लेखन के माध्यम से उसने ज्ञान, धर्म, और साहित्य का संरक्षण किया। 1. प्राचीन भारतीय भवन निर्माण प्राचीन भारत में भवनों का निर्माण मुख्य रूप से धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए किया जाता था। इन भवनों का डिजाइन और निर्माण भारतीय वास्तुकला का अहम हिस्सा था। हम देखेंगे कि कैसे प्राचीन भारतीय समाज ने अपने मंदिरों, महलों और अन्य महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण किया, और इनमें किस प्रकार की वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया। 1.1 मंदिरों का निर्माण भारत में मंदिरों का निर्माण धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए किया जाता था। प्राचीन भारतीय मंदिरों का वास्तुशिल्प अत्यंत समृद्ध था और इन्हें गढ़ने में विशेष तकनीकों का प्रयोग किया गया था। विहार, स्तूप और गुफाएँ भी प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक निर्माण थे। मंदिरों में सबसे महत्वपूर्ण भाग उनकी शिखर या शिखर-मंडप होता था। इसे वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता था। खजुराहो, भीमबेटका और अजन्ता की गुफाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि प्राचीन भारत में धार्मिक स्थानों का निर्माण कला और वास्तुकला के उच्चतम मानकों पर किया गया था। भारत में मंदिरों के निर्माण में विवृद्धि और शिलालेख का भी विशेष महत्व था। इन शिलालेखों में धार्मिक विचारों, शासक के आदेशों और ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया जाता था। उदाहरण के रूप में अजन्ता और एल्लोरा की गुफाएँ और खजुराहो मंदिरों में सुंदर चित्रकला और शिल्पकला का समावेश हुआ था। 1.2 महल और किलों का निर्माण प्राचीन भारत में शासकों ने अपनी शक्ति और वैभव को प्रदर्शित करने के लिए किलों और महलों का निर्माण भी किया। दिल्ली का किला, आगरा का किला और जयपुर के किले इस प्रकार के निर्माण के उदाहरण हैं। इन महलों और किलों में सुरक्षा, प्रशासनिक कार्य और शाही गतिविधियों का आयोजन होता था। महल और किले ज्यादातर भारी पत्थरों, ईंटों और लकड़ी से बनाए जाते थे। किलों के भीतर हर प्रकार की व्यवस्था, जैसे पानी की आपूर्ति, बगीचे, और शाही मंदिरों का निर्माण किया जाता था। 2. प्राचीन भारतीय चित्रकला चित्रकला का भारत में बहुत पुराना इतिहास रहा है। प्राचीन काल में चित्रकला का उपयोग धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक घटनाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता था। चित्रकला में मुख्यतः धार्मिक और मिथकीय दृश्य होते थे, लेकिन समय के साथ यह समाज और संस्कृति के अन्य पहलुओं को भी उजागर करने लगी। 2.1 गुफा चित्रकला प्राचीन भारत में गुफाओं में चित्रकला के प्रमुख उदाहरण मिलते हैं। अजन्ता और एल्लोरा की गुफाएँ भारत की सबसे प्रसिद्ध चित्रकला गुफाएँ हैं। इन गुफाओं की दीवारों पर सुंदर चित्रकारी की गई थी, जो बौद्ध धर्म के धार्मिक विषयों को दर्शाती थी। अजन्ता की गुफाओं में चित्रित दृश्यों में बुद्ध की कहानियाँ, उनके जीवन के विभिन्न दृश्य और बौद्ध धर्म की शिक्षा को दर्शाया गया है। इसके अलावा, भीमबेटका गुफाएँ भी प्राचीन चित्रकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जहाँ पेंटिंग्स के माध्यम से प्राचीन मानव जीवन की झलकियाँ दिखाई देती हैं। इन चित्रों में शिकार, धार्मिक अनुष्ठान और जीवन के अन्य पहलुओं का चित्रण किया गया था। 2.2 मंदिर चित्रकला प्राचीन भारतीय मंदिरों में चित्रकला का उपयोग भव्य रूप से किया जाता था। खजुराहो और सुनारी मंदिरों में दृश्यात्मक कला के बहुत सुंदर उदाहरण मिलते हैं, जहां धार्मिक कथाएँ और दैवीय शक्ति को चित्रित किया गया है। मंदिरों के भीतर चित्रकला के माध्यम से देवताओं की महिमा और उनके विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व किया जाता था। 2.3 पेट्रोग्राफ (पत्थर पर चित्र) प्राचीन भारतीय चित्रकला का एक और रूप पत्थरों पर चित्र बनाने का था। इसे पेट्रोग्राफ कहते हैं। यह तकनीक भारतीय कला में बहुत प्रसिद्ध थी और इससे मंदिरों, किलों और अन्य धार्मिक स्थलों पर चित्र बनाए जाते थे। इस प्रकार की चित्रकला में दृश्यों की विशेषता होती थी, जिसमें रचनाएँ और मनुष्य, देवता और प्रकृति के सुंदर रूप चित्रित होते थे। 3. प्राचीन भारतीय साहित्य और पुस्तकें प्राचीन भारतीय साहित्य और पुस्तकें भारतीय ज्ञान और संस्कृति का खजाना थीं। प्राचीन काल में साहित्य का मुख्य उद्देश्य धर्म, जीवन के सिद्धांत, और सामाजिक कर्तव्यों को बताना था। इन पुस्तकों के माध्यम से प्राचीन भारतीय समाज ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा। 3.1 धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथ प्राचीन भारतीय साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ वे थे जो धार्मिक और दार्शनिक विचारों पर आधारित थे। इनमें वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण, भगवद गीता, और पुराण प्रमुख हैं। 3.2 साहित्यिक और काव्यकाव्य ग्रंथ प्राचीन भारतीय साहित्य में काव्यकाव्य और काव्य लेखन का एक महत्वपूर्ण स्थान था। कालिदास का कुमारील भट्ट, शाकुंतल, और मेघदूत जैसे काव्यग्रंथ भारतीय साहित्य के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। कालिदास ने संस्कृत साहित्य को शिखर तक पहुँचाया और उनकी रचनाएँ आज भी भारतीय साहित्य में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। 3.3 गणित, खगोलशास्त्र और चिकित्सा के ग्रंथ प्राचीन भारतीय विद्वान गणित, खगोलशास्त्र और चिकित्सा में भी विशेषज्ञ थे। आर्यभट ने गणित और खगोलशास्त्र पर महान कार्य किए थे, और उनका आर्यभटीय ग्रंथ गणित और खगोलशास्त्र का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके अलावा, चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे चिकित्सा ग्रंथ प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। 4. निष्कर्ष “भवन, चित्रकला और पुस्तकें” अध्याय हमें यह सिखाता है कि प्राचीन भारतीय समाज ने कला, वास्तुकला, और साहित्य के माध्यम से अपनी संस्कृति और धार्मिक विचारों को व्यक्त किया। भवन निर्माण में मंदिरों, किलों और महलों की महत्वपूर्ण भूमिका थी, जबकि चित्रकला ने धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओं को चित्रित किया। प्राचीन भारतीय साहित्य ने ज्ञान, धर्म और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया, और यह हमें आज भी हमारे इतिहास और संस्कृति से जोड़ता है। प्राचीन भारतीय भवन, चित्रकला और साहित्य ने भारतीय सभ्यता को न केवल समृद्ध किया, बल्कि इसे समग्र रूप से दुनिया के अन्य हिस्सों के साथ भी जोड़ा। इन सभी कला
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