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Concept of Development and Growth | विकास की अवधारणा और वृद्धि

 बाल मनोविज्ञान को अध्ययन करने के लिए विकाश , वृद्धि और परिपक्वता के अर्थ को समझना और इसके अंतर को जानना बहुत जरूरी है ।     विकास की अवधारणा   विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जो निरंतर चलती है , इसमे गुणात्मक एवं परिणात्मक परिवर्तन दोनो ही     सम्मिलित रहते है। गुणात्मक परिवर्तन  बच्चो के उम्र बढ़ने पर संवेगात्मक (emotional) परिवर्तन, भाषा सीखने की क्षमता में परिवर्तन इत्यादि। परिणात्मक परिवर्तन    शरीर का कद बढ़ना, वजन बढ़ना, बनावट आदि में परिवर्तन। विकास के अभिलक्षण (characteristic)  विकास की प्रक्रिया गर्भधारण से मृत्य तक चलती है।  विकास बहुआयामी (Multi Dimension) और प्रासंगिक (relevant) होती है।  विकास की गति व्यक्तिगत अंतर से प्रभावित होती है।  विकास की प्रक्रिया सिर से पैर की तरफ बढ़ती है , जबकि मानसिक क्षेत्र में ये मूर्त से अमूर्त की ओर   होती है।  विकास सामान्य अनुक्रिया से विशिष्ट अनुक्रिया की ओर होती है।  शारीरिक और मानसिक विकास आपस मे धनात्मक रूप से सहसंबंधी होते है।  वृद्धि (Growth)  बालको के शारीरिक संरचना के विकास जिसमे लंबाई, भार, मोटाई तथा अन्य अंगों का विकास आता है उसे “वृद्धि” कहते है। इसकी प्रक्रिया आंतरिक एवं बाह्य दोनों रूप से होती है। वृद्धि एक निश्चित आयु तक होती है। वृद्धि पर अनुवांशिकता (Hereditary) का सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ते है।   विकास की अवस्थाएं  विकास की अवस्था के संबंध में अलग अलग मनोवैज्ञानिकों की अलग अलग मत है। रॉस व फॉयड ने पांच अवस्थाएं बताई है , जबकि कॉलसेनिक दस तथा पियाजे ने चार और ब्रूनर ने तीन अवस्थाएं बताई है। भारत मे सामान्यतः विकास के अवस्था को इस प्रकार विभाजित किया गया है  i) पूर्व प्रसूतिकाल :-  यह अवस्था गर्भधारण से लेकर जन्म तक होती है। (ii) शैशवास्था :-      यह अवस्था जन्म से लेकर 2 वर्षो तक होती है। (iii) बाल्यावस्था :-   प्रारंभिक बाल्यावस्था (early childhood) 2 से 6 साल होती है। * उत्तर बाल्यावस्था (Later Childhood) :- 6 वर्ष से 12 वर्ष तक होती है। (iv) किशोरावस्था :- 12 वर्ष से 18 वर्ष तक (v) युवावस्था :- 18 वर्ष से 30 वर्ष (vi) प्रौढावस्था :- 30 से 60 वर्ष तक (vii) वृद्धावस्था :- 60 वर्ष से मृत्य तक। शिक्षा मनोविज्ञान व बाल मनोविज्ञान में सभी अवस्थाओं का अध्ययन महत्वपूर्ण नही है। इसके प्रमुख अवस्थाएं है :- शैशवावस्था , बाल्यावस्था और किशोरावस्था है।।  शैशवावस्था :- जन्म से 2 वर्ष की अवस्था को शैशवावस्था कहा जाता है , जिसमे शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास तेज़ी से होता है। इस अवस्था मे बालक पूर्ण रूप से माता-पिता पर आश्रित होते है। इस समय बच्चा पुनरावृति, प्रयास व त्रुटिपूर्ण व्यवहार, वस्तु की प्रधानता, छोटे-छोटे शब्दो का प्रयोग आदि करते है।  बाल्यावस्था (Childhood):- बाल्यावस्था के दो चरण है – प्रारंभिक बाल्यावस्था और उत्तर बाल्यावस्था । (i) प्रारंभिक बाल्यावस्था :- यह अवस्था 2 से 6 वर्ष तक की मानी जाती है। इस समय बच्चे बच्चे ज्यादा जिद्दी, विरोधात्मक, आज्ञा न मानने वाले होते है। बालको में जिज्ञासा ज्यादा होती है और वो खिलौनो से खेलना पसंद करते है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से यह काल भाषा सीखने की सबसे उत्तम अवस्था होती है। (ii) उत्तर बाल्यावस्था :- यह अवस्था 6 से 12 वर्षो तक माना जाता है। इस अवस्था मे बच्चे स्कूल जाना प्रारम्भ कर देते है। बच्चो में नैतिक, बौद्धिक, सामाजिक, तर्कशील का वयापक विस्तार का विकास होता है। बालक सरारत करते है, समूह में रहना पसंद करते है। इस समय घूमने की प्रवृति का विकास होता है, बच्चो को अनुशासन और नियमो के महत्व समझ आने लगती है। इस समय बालक स्वयं से संबंधित बातें अधिक करते है। (iv) किशोरावस्था (youth / adolescence) :- 12 से 18 वर्ष की आयु को किशोरावस्था कहा जाता है, जिसमे बच्चो के महत्वपूर्ण शारीरिक, सामाजिक, संवेगात्मक, संज्ञानात्मक विकास होते है। इस अवस्था मे मित्र बनाने की प्रवृति तीव्र होती है और सामाजिक संबंधों में वृद्धि होती है। साथ ही साथ बच्चो में ऊंची आकांक्षाएं, कल्पनाएं, नाइ आदते, व्यवहार में भटकाव, नशा या अपराध की तरफ झुकाव आदि देखने को मिलता है। इसलिए इन्हें इस अवस्था मे शिक्षकों, मित्रो एवं अभिभावकों के मार्गदर्शन एवं सलाह जी जरूरत पड़ती है। 4. विकास के आयाम (Dimension of Development) :- मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन के दृष्टिकोण से विकास को निम्नलिखित भागो में बंटा गया है :- (i) शारीरिक विकास :- शिशु का शारीरिक विकास गर्भावस्था से ही प्रारंभ हो जाता है। शरीर के बाहरी परिवर्तन तो स्पष्ट रूप से दिखते है लेकिन साथ ही साथ इनका विकास शरीर के अंदर भी होता रहता है। आकर एवं भार, मांसपेशियाँ एवं हड्डियां, मस्तिष्क और पाचन तंत्र समय के साथ साथ विकसित होता रहता है। बालको के परिवेश एवं उनके देखभाल के भी उनके शारीरिक विकास पर असर होता है। अगर बच्चो को पर्याप्त आहार न मिले तो उनके शारीरिक विकास के सामान्य गति में रुकावट आ सकती है। बालको के वृद्धि एवं विकास के बारे में शिक्षकों को पर्याप्त जानकारी इसलिए भी रखना अनिवार्य है ताकि बच्चो के रुचि , इच्छाएं, दृष्टिकोण एवं एक तरह से उनका पूर्ण व्यवहार शारीरिक वृद्धि एवं विकास पर ही निर्भर करता है। बच्चो के शारीरिक वृद्धि एवं विकास के सामान्य ढांचे से परिचित होकर अध्यापक यह जान सकते है कि एक विशेष आयु स्तर पर बच्चो से क्या उम्मीद की जा सकती है।। (ii) मानसिक या संज्ञात्मक विकास (Mental or Cognitive Development) :- मानसिक विकास का मुख्य साधन ज्ञानेन्द्रियो की क्षमता एवं गुणवत्ता का विकास होता है। इसके अंतर्गत भाषा , स्मृति, तर्क, चिंतन, कल्पना, निर्णय जैसी योग्यताओं को शामिल किया जाता है। जन्म के समय बालक में इस प्रकार की योग्यताओ की कमी रहती है। धीरे धीरे आयु बढ़ने के साथ साथ मानसिक विकास की गति बढ़ती रहती है। संज्ञानात्मक विकास के बारे में शिक्षकों को पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए ताकि वो इसके अभाव में बालको से संबंधित समस्याओं का समाधान कर सके। यदि कोई बालक मानसिक रूप से कमजोर है, तो इसके कारण का पता कर उनके समस्याओं का समाधान कर सके। विभिन्न अवस्थाओं और आयु-स्तर के बच्चो में मानसिक वृद्धि और विकास को ध्यान में रख उपयुक्त पाठ्यक्रम तैयार कर सके। (iii) भाषायी विकास :- भाषा के विकास को भावनात्मक विकास माना जाता है। भाषा के माध्यम से बालक अपने मन के भावों, विचारों को एक-दूसरों के सामने रखता है और दूसरों के भावनाओ एवं विचारों को समझता है। भाषाई ज्ञान के अंतर्गत

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Government ( सरकार ) | केंद्र सरकार और राज्य सरकार |

  सरकार का अर्थ :-  सरकार राज्य का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। भारत मे संघीय सरकार है । यहां दो स्तरों पर सरकार का गठन किया गया है – केंद्र और राज्य । सरकार राज्य का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। प्रत्येक सरकार के तीन अंग होते हैं – व्यवस्थापिका (विधायिका), कार्यपालिका व न्यायपालिका। कार्यपालिका का काम संविधान और कानून के अनुसार देश का शासन चलाना है । व्यवस्थापिका देश के लिए कानून बनाती है। न्यायपालिका कानून के खिलाफ काम करने पर सजा देती है।  सरकार के विभिन्न स्तर :-  भारत मे सरकार के तीन स्तर है – केंद्रीय स्तर, राज्य स्तर और स्थानीय स्तर।   1. केंद्रीय ( राष्ट्रीय ) स्तर केन्द्रीय स्तर का सम्बन्ध पूरे देश से होता है। सम्पूर्ण देश का संचालन केन्द्र सरकार के द्वारा होता है।  2. राज्य स्तर  राज्य स्तर का सम्बन्ध देश के या संघ के विभिन्न इकाइयों से हैं, जैसे-उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब इत्यादि।  3. स्थानीय स्तर स्थानीय स्तर का सम्बन्ध देश के सबसे निचले स्तर से अर्थात् पंचायत व नगर पालिका से है। पंचायत ग्रामीण स्तर के लिए व नगर पालिका शहरी क्षेत्र के लिए है। सरकार के कार्य :-  भारत के सन्दर्भ में सरकार के सभी स्तरों पर विभिन्न कार्य एवं शक्तियाँ हैं।  केन्द्रीय स्तर की सरकार के कार्य-संविधान के द्वारा संघ सूची में उल्लेखित हैं – सम्पूर्ण देश के लिए कानून का निर्माण करना, इसका परिचालन, सम्पूर्ण देश के नागरिकों के लोक कल्याण को बढ़ावा देना, राष्ट्र की सुरक्षा व रक्षा करना व दूसरे देश के साथ सम्बन्धों को विकसित करना।  राज्य स्तर की सरकार के कार्य संविधान के तहत राज्य सूची में उल्लेखित हैं-राज्य, क्षेत्र विशेष के लिए अर्थात् अपने राज्य के लिए कानून बनाना व उनका परिचालन कराना, राज्य के नागरिकों के लोक कल्याण को बढ़ावा देना, राज्य के विकास कार्य को करना, कृषि, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराना। स्थानीय स्तर की सरकार के कार्य व शक्तियों का प्रावधान संविधान के तहत भाग-9 व 9(क) तथा अनुसूची 11वीं व 12वीं में किया गया है। इसका स्थानीय स्तर पर नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना है। जैसे-शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य इत्यादि। Project-method-of-teaching   सरकार के विभिन्न प्रकार व रूप . सरकार के अनेक प्रकार व रूप होते हैं-राजतंत्र, निरंकुशतंत्र, कुलीनतंत्र, लोकतंत्र, इत्यादि। लोकतंत्र लोकतंत्र वर्तमान में सर्वश्रेष्ठ शासन व्यवस्था है। लोकतंत्र लोगों या जनता का शासन होता है।लोकतंत्र में लोगों के द्वारा ही सरकार को निर्णय लेने, कानून का पालन करवाने की बाह्य शक्ति प्रदान की जाती है। लोकतंत्र में सरकार को यह शक्ति जनता चुनाव या निर्वाचन के माध्यम से देती है। लोकतंत्र में सरकार किसी भी प्रकार के निर्णय व कार्यों के लिए जनता के प्रति ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी होती हैं।  राजतंत्र राजतंत्र में राजा या रानी के पास किसी भी प्रकार के निर्णय लेने व सरकार चलाने की शक्ति होती है। राजतंत्र के तहत राजा के पास सलाहकारों का एक छोटा-सा समूह होता है जिससे वह विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर सकता है परन्तु निर्णय लेने की अंतिम शक्ति राजा के पास ही होती है। राजतंत्र के विपरीत एक निरंकुश सरकार या निरंकुश राजतंत्र सरकार भी होती है जिसमें राजा या रानी की इच्छा ही कानून होता है। इसमें जनता पर निरंकुश तरीके से शासन किया जाता है।  कुलीन तन्त्र कुलीनतंत्र सरकार एक ऐसी सरकार होती है जिसमें कुछ व्यक्ति मिलकर शासन करते है। सम्पूर्ण सत्ता या शासन का अधिकार कुछ व्यक्तियों के हाथ में रहता है। आधिनायकव अधिनायकत्व सरकार ऐसी सरकार होती है जो प्रजा के ऊपर निरंकुशता पूर्वक शासन करती है। इस प्रकार की शासन प्रणाली में लोगों को किसी प्रकार की स्वतंत्रता व अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं, जैसे-फासीवादी व नाजीवादी सरकार। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र सरकार को प्रतिनिधि लोकतंत्र कहते हैं। प्रतिनिधि लोकतंत्र में जनता प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेती है। वे अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करती हैं। स्थानीय सरकार व प्रशासन स्थानीय सरकार का अर्थ भारत में स्थानीय सरकार का जनक भारत के वायसराय लार्ड रिपन (1880-1884) को माना जाता है। भारत में पंचायती राज का जनक बलवन्त राय मेहता को माना जाता है। स्थानीय सरकार किसी भी देश में लोकतंत्र की प्रारम्भिक सीढ़ी होती है अत: लोकतंत्र का प्रथम स्तर है। स्थानीय सरकार का तात्पर्य है कि ऐसी सरकार जिसमें स्थानीय स्तर पर जनता द्वारा शासन प्रक्रिया में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी होती है। स्थानीय सरकार का विकास  प्राचीन .काल में भारत में सरकार का  स्वरुप स्थानीय स्तर पर ही निर्धारित होता था। भारत में दक्षिण भारत में चोल साम्राज्य की स्थानीय प्रशासन सबसे आदर्श व्यवस्था समझी गई है।चोल साम्राज्य के तहत स्थानीय सरकार को केन्द्रीय साम्राज्य से पूर्ण स्वायत्तता प्राप्त की। स्थानीय सरकार के प्रतिनिधियों के लिए एक स्पष्ट संहिता बनाई गई थी जिसमें उनकी योग्यता, कार्य प्रणाली व स्वरूप का एक आदर्श रूप में प्रस्तुत किया गया था। भारत में मध्यकाल में स्थानीय सरकार के विकास में रूकावट आई। स्थानीय प्रशासन पर धर्म व उसकी कार्यप्रणाली का प्रभाव पड़ा। आधुनिक युग में ब्रिटिश साम्राज्य के तहत स्थानीय सरकार में विकास प्रक्रिया की शुरूआत हुई थी। विशेषकर लार्ड रिपन के काल में। लार्ड रिपन ने स्थानीय सरकार की स्वायत्तता व उसके कार्य क्षेत्र के विस्तार को समर्थन दिया इसलिए लार्ड रिपन को स्थानीय सरकार का जनक माना जाता है। ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत  ग्राम सभा एक पंचायत के क्षेत्र में रहने वाले सभी वयस्कों की सभा होती है। कोई भी व्यक्ति जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे ज्यादा हो, जिसे वोट देने का अधिकार प्राप्त हो और जिसका नाम गाँव के मतदाता सूची में उल्लेखित है ऐसे ग्राम समूह को ही ग्राम सभा कहा जाता है। एक गाँव की एक ग्राम सभा हो सकती है और एक गाँव की दो ग्राम सभा भी हो सकती हैं। एक या एक से अधिक गाँव को मिलाकर एक ग्राम सभा भी हो सकती है।  एक ग्राम पंचायत कई वार्डों (छोटे क्षेत्रों) में बंटी हुई होती है। प्रत्येक वार्ड अपना एक प्रतिनिधि चुनता है, जो वार्ड पंच के नाम से जाना जाता है। ग्राम पंचायत का एक सचिव होता है जो ग्राम सभा का भी सचिव होता है। यह सरकारी कर्मचारी होता है। सचिव का काम

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विविधतता | Diversity | ctet ctet2022 ctet success CDP pedagogy

  विविधता का सामान्य अर्थ :- विविधता का सामान्य अर्थ है कि भौगोलिक रूप से, सांस्कृतिक रूप से, भाषा व वेशभूषा, धर्म इत्यादि के आधार पर विभिन्न स्वरूप में एक समाज व एक देश विशेष पर रहना। साम्प्रदायिकता का सामान्य अर्थ :-  साम्प्रदायिकता का अर्थ है कि जब किसी समाज में विभिन्न वर्गों व सम्प्रदाय विशेष के बीच किसी विशेष समस्या व घटनाओं के परिणाम स्वरूप आपसी द्वेष या भेदभाव के विरोध में होने वाली सामाजिक घटना। सामान्यतः साम्प्रदायिकता को नकारात्मक रूप में ही समझा जाता है।    * पूर्वाग्रह का सामान्य अर्थ है :- पूर्वाग्रह का सामान्य अर्थ है जब हम किसी समाज का, धर्म व कार्य के बारे में पहले से ही कोई राय या अवधारणा बना लेते हैं और इस अवधारणा को मस्तिष्क में बिठा लेते हैं तो वह पूर्वाग्रह का रूप धारण कर लेता है। रूढ़िवादिता का सामान्य अर्थ :- रूढ़िवादिता का सामान्य अर्थ है कि जो व्यक्ति समाज के किसी वर्ग या परिघटना के प्रति सभी लोग एक ही छाँव में बाँध देते हैं या उनके बारे में एक धारणा पक्की या स्थायी बना लेते हैं तो उसे रूढ़िबद्ध धारणा कहते हैं। असमानता का सामान्य अर्थ :-  असमानता का सामान्य अर्थ है किसी समाज व देश विदेश में व्यक्ति द्वारा सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक स्तर पर किया जाने वाला विषमता युक्त व्यवहार। अस्पृश्यता या छुआछूत :- अस्पृश्यता का मतलब है समाज में जाति या वर्ग व धर्म के आधार पर किया जाने वाला भेद-भाव पूर्ण व्यवहार। भारत में विविधता के विभिन्न पहलू :- भारत में सामाजिक, सांस्कृतिक राजनीतिक व आर्थिक स्तर पर ‘विविधता में एकता का स्वरूप है                    जो इस प्रकार है :-    भाषा :- भाषा ही संस्कृति को विविधता प्रदान करती है। प्रारम्भ से ही भारत में अनेक भाषाएँ बोली जाती रही है। भाषा के विकास ने ही विभिन्न धर्मग्रन्थों, महाकाव्य, नाटक तथा साहित्य की रचनाओं में योगदान दिया। ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ जैसे महाकाव्यों का निर्माण भाषा के विकास के साथ ही हुआ, विभिन्न क्षेत्रों के निवासियों की अलग-अलग ম के कारण साहित्य भाषाएँ विकसित हुईं। इन भाषाओं का जो विकास हुआ, उसने भी भारतीय राष्ट्रीय जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विभिन्न साहित्यिक रचनाओं ने भी भारत की एकता’ का ही पाठ पढ़ाया।               भारत के संविधान में 8वीं अनुसूची में प्रारम्भ में केवल 14 भाषाओं का प्रावधान था परन्तु वर्तमान में 22 भाषाएँ उल्लेखित हैं। भारत में कुछ भाषाएँ हैं जिन्हें शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त है-संस्कृत, तेलगू, तमिल, कन्नड़ व मलयालम ।    कला व नृत्य :- भारत विभिन्न कला व नृत्य शैली की विविधता वाला देश है। भारत के प्रत्येक भौगोलिक भाग व राज्य समाज व वर्ग की राष्ट्रीय कला व नृत्य के साथ-साथ लोक-कलाएँ व नृत्य प्रचलित है।  भारत में कुछ नृत्य ऐसे हैं जिन्हें शास्त्रीय नृत्य का दर्जा दिया गया है। जैसे: कथक, भरतनाट्यम. कुचिपुड़ी, कथकली, मणिपुरी और ओडिसी।                                                                                                                                                                          क्षेत्र  :- भारत में न केवल धर्म और भाषा की विविधता है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोग भी यहाँ निवास कर रहे हैं। भारत में राष्ट्रीयता की भावना भी विद्यमान है एक क्षेत्र के लोग दूसरे क्षेत्र के लोगों से अपने को भिन्न मानते हैं। उन्हें अपने क्षेत्र और प्रान्त के लिए अत्यधिक स्नेह है परन्तु, यह भावना प्रबल है कि विभिन्न क्षेत्रों में रहते हुए भी हम भारत के नागरिक हैं। भारत का विकास ही सभी क्षेत्र के लोगों का मूल उद्देश्य है।                                      विविधता में एकता :- स्पष्ट है कि भारत विविधताओं का देश है। साथ ही ‘विविधता में एकता’ भारत राष्ट्र की अपनी विशेषता है। हम धर्मनिरपेक्ष राज्य के नागरिक है भारत में विविधता शुरु से है पर, हम लोग 5 मिलजुलकर रहते आए हैं। हिन्दू और मुसलमान मुगल-शासकों के समय में भी साथ-साथ रहते थे। पर्व-त्यौहार के अवसर पर भी वे साथ रहे हैं होली, दीपावली, और दशहरा आदि पर्यो में मुसलमान भी साथ देते हैं। ईद के मौके पर हिन्दू भी मुसलमान साथियों को मुबारकबाद देते है। सिखों के गुरुद्वारे में हिन्दू भी जाते हैं और हिन्दू मन्दिरों में सिख भी पूजा करने जाते हैं अलग-अलग होते हुए भी हम न भारतवासी एक है।  जवाहर लाल नेहरू ने ही अपनी किताब ‘भारत एक खोज’ में ‘अनेकता में एकता’ का विचार दिया था। रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ भी भारतीय एकता की एक अभिव्यक्ति है। विश्व/संसार में आठ मुख्य धर्म है-ईसाई, स्कूल, यहूदी, हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख व पारसी आदि। भारत में इन सभी आठ धर्मों के अनुयायी है, जिसमें छः अल्पसंख्यक धर्म हैं-इस्लाम, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई वो पारसी। भारत में 1600 से ज्यादा भाषाएँ व बोलियाँ बोली जाती है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर 18911956 को भारत के संविधान का जनक व दलितों के सबसे बड़े नेता के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म ‘महार जाति’ में हुआ था। 1947 के बाद देश की आजादी के उपरान्त संविधान में भारतीय नागरिकों को 7 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए परन्तु वर्तमान में 6 मौलिक अधिकार प्राप्त हैं-समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार व संवैधानिक उपचारों का अधिकार।       भारत में विविधता व एकता के समक्ष अनेक चुनौतियां व समस्याएँ :- 1. जातिवाद 2. क्षेत्रियातावाद 3. भाषावाद 4. साम्प्रदायिकता 5. नक्सलवाद/आतंकवाद 6. क्षेत्रीय असमानता 7. भ्रष्टाचार 8. भाई-भतीजावाद 9. अशिक्षा/निरक्षरता 10. गरीबी 11. बेरोजगारी

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नई शिक्षा नीति को मंजूरी | HRD अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा |NEP 2020

कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि 34 साल बाद भारत की नई शिक्षा नीति आई है। स्कूल-कॉलेज की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं।  कैबिनट ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दे दी है। जिससे स्कूल और उच्च शिक्षा स्तरों पर बड़े पैमाने पर सुधार हुए है। यह 21वी सदी की पहली शिक्षा नीति है जो शिक्षा की 34 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय नीति (NPE, 1986) की जगह लेती है।  स्कूल और कॉलेज दोनों की शिक्षा को 21वी सदी के जरूरतों के अनुकूल और समग्र , लचीला, बहु-विषयक बना कर एक जीवंत ज्ञान और वैश्विक ज्ञान महाशक्ति में बदलना है। इसका उद्देश्य है प्रत्येक छात्र की अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाना है।  NEP 2020, के तहत लगभग 2 कड़ोड स्कूली बच्चो को वापस मुख्य धारा में लाया जाएगा। NCP 2020 सभी स्तरों पर स्कूल सार्वभौमिक पहुँच को सुनिश्चित करता है।  सरकार ने बताया कि मौजूदा शिक्षा नीति के तहत फिजिक्स ऑनर्स के साथ केमिस्ट्री, मैथ्स लिया जा सकता है। इसके साथ फैशन डिजाइनिंग नहीं ली जा सकती थी। लेकिन नई नीति में मेजर और माइनर की व्यवस्था होगी। जो मेजर प्रोग्राम हैं उसके अलावा माइनर प्रोग्राम भी लिए जा सकते हैं। इसके दो फायदे होंगे।   HRD मंत्रालय अब शिक्षा मंत्रालय हो जाएगा   मानव संसाधन मंत्रालय को फिर से शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। पहले इस मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय ही था। साल 1985 में इसे बदलकर मानव संसाधन मंत्रालय नाम दिया गया था।  स्कूली शिक्षा में 10+2 प्रारूप अब खत्म  नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा में 10+2 फॉर्मेट को खत्म कर दिया गया है। इसे 10+2 से 5+3+3+4 फॉर्मेट में ढाला गया है। इसका मतलब है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 और कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे। फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा। इसके बाद में तीन साल मध्य चरण (कक्षा 6 से 8) और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष (कक्षा 9 से 12) होंगे।

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भारत के प्रमुख बांध एवं नदी परियोजनाएँ

🌺🌸 भारत के प्रमुख बांध एवं नदी परियोजनाएँ 🌸🌺 Join Now👉 t.me/EduCtet1 🍫1. इडुक्की परियोजना (Idukki Dam) – पेरियार नदी (Periyar River) – केरल (Kerala) 🍫2. उकाई परियोजना (Ukai Project) – ताप्ती नदी (Tapi river) – गुुजरात (Gujarat) 🍫3. काकड़ापारा परियोजना (Kakrapar project) – ताप्ती नदी (Tapi river) – गुुजरात (Gujarat) t.me/EduCtet1 🍫4. कोलडैम परियोजना (Koldam project) – सतलुज नदी – (Sutlej River) – हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) 🍫5. गंगासागर परियोजना (Ganga Sagar project) – चम्बल नदी (Chambal River) – मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) 🍫6. जवाहर सागर परियोजना (Jawahar Sagar Project) – चम्बल नदी (Chambal River) – राजस्थान (Rajasthan) 🍫7. जायकवाड़ी परियोजना (Jayakwadi project ) – गोदावरी नदी (Godavari river) – महाराष्ट्र (Maharashtra) 🍫8. टिहरी बाँध परियोजना (Tehri Dam Project) – भागीरथी नदी (Bhagirathi River) – उत्तराखण्ड (Uttarakhand) 🍫9. तिलैया परियोजना (Tilaiya Project) – बराकर नदी (Barakar River) – झारखंड (Jharkhand) 🍫10. तुलबुल परियोजना (Tulbul Project) – झेलम नदी (Jhelum River) – जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) 🍫11. दुर्गापुर बैराज परियोजना (Durgapur Barrage Project) – दामोदर नदी (Damodar River) – पश्चिम बंगाल (West Bengal) t.me/EduCtet1 🍫12. दुलहस्ती परियोजना (Dul Hasti Project ) – चिनाब नदी (Chenab River) – जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) 🍫13. नागपुर शक्ति गृह परियोजना (Nagpur Power Station Project) – कोराडी नदी (Koradi River) – महाराष्ट्र (Maharashtra) 🍫14. नागार्जुनसागर परियोजना (Nagarjuna Sagar Project) – कृष्णा नदी (Krishna River) – आन्ध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) 🍫15. नाथपा झाकरी परियोजना (Nathpa Jhakri project) – सतलज नदी (Sutlej River) – हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) t.me/EduCtet1 🍫16. पंचेत बांध (Panchet Dam) – दामोदर नदी (Damodar River) – झारखंड (Jharkhand) 🍫17. पोचम्पाद परियोजना (Pochampad project) – महानदी (Mahanadi) – कर्नाटक (Karnataka) 🍫18. फरक्का परियोजना (Farakka project) – गंगा नदी (Ganges River ) – पश्चिम बंगाल (West Bengal) 🍫19. बाणसागर परियोजना (Bansagar project) – सोन नदी (Son River) – मध्य प्रदेश (Madya Pradesh) 🍫20. भाखड़ा नांगल परियोजना (Bhakra Nangal Project) – सतलज नदी (Sutlej River) – हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) t.me/EduCtet1 🍫21. भीमा परियोजना (Bhima Project) – पवना नदी (Pavana River) – तेलंगाना (Telangana) 🍫22. माताटीला परियोजना (Matatila project ) – बेतवा नदी (Betwa River) – उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) t.me/EduCtet1 🍫23. रंजीत सागर बांध परियोजना (Ranjit Sagar Dam Project ) – रावी नदी (Ravi River) – जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) 🍫24. राणा प्रताप सागर परियोजना (Rana Pratap Sagar Project ) – चम्बल नदी (Chambal River) – राजस्थान (Rajasthan) t.me/EduCtet1 🍫25. सतलज परियोजना (Sutlej Project) – चिनाब नदी (Chenab River) – जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) 🍫26. सरदार सरोवर परियोजना (Sardar Sarovar Project) – नर्मदा नदी (Narmada River) – गुुजरात (Gujarat)  t.me/EduCtet1 🍫27. हिडकल परियोजना (Hidkal project) – घाटप्रभा परियोजना (Ghataprabha River) – कर्नाटक (Karnataka)

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EVS IMPORTANT QUESTION | पर्यावरण अध्ययन के अति महत्वपूर्ण प्रश्न |

     Q 1. पाठ्य सहगामी क्रियाओं का प्रमुख उद्देश्य               होता  है? (a) छात्रों के विकास को बाधित करना (b) छात्र अनुशासनहीनता की समस्याओं का निदान              करना (c) छात्र को उन्नतशील वातावरण प्रदान करना (d) छात्रों को विद्यालय छोड़ने से बचाना Q 2. एनीमिया होने का मुख्य कारण है:-  (a) खून में लौह की कमी  (b) शरीर में विटामिन C की कमी (c) यकृत में पित्त की कमी  (d) शरीर में आयोडीन की कमी  Q 3. जीव एवं जन्तुओं दोनों में मिलने वाली समान            क्रिया है:-  (a) वृद्धि और भोजन बनाना  (b) प्रजनन और भोजन बनाना  (c) प्रजनन और अंकुरण  (d) वृद्धि और प्रजनन  बार बार पूछे जाने वाले CTET के प्रश्न Q 4. पारितंत्र में होती है :-  (a) ऊर्जा हानि व खनिजों का लाभ  (b) ऊर्जा लाभ व खनिजों की हानि  (c) ऊर्जा व खनिजों दोनों की हानि (d) ऊर्जा व खनिजों दोनों का लाभ  Q 5. रेशम किससे बनता है? (a) लारवा की लार-ग्रन्थियों से (b) वयस्क की लार-ग्रन्थियों से  (c) वयस्क की क्यूटिकल से  (d) कीट के पैर से Project Method | परियोजना विधि Q 6. दूध से प्राप्त प्रोटीन बहुत सारी इकाइयों से             मिलकर बनी होती है ये इकाइयाँ कहलाती है। (a) वसीय अम्ल  (b) उच्च गलनांक वाले अम्ल (c) अमीनो अम्ल (d) कार्बनिक अम्ल Q 7. पर्यावरण शिक्षा व्याख्या करती है :-  (a) मानव व समाज के बीच सहसम्बन्धों की  (b) मनुष्य व प्रकृति के बीच सहसम्बन्धों की (c) धर्म व जाति के बीच सहसम्बन्धों की  (d) मानव व विज्ञान के बीच सहसम्बन्धों की  Individual Different | वैयक्तिक विभिनता के महत्वपूर्ण प्रश्न Q 8. निम्न में से लद्दाख में बने घरों की विशेषता नहीं है:-  (a) लकड़ी की छतें  (b) लकड़ी का फर्श (c) लोहे का फर्श  (d) मोटी दीवार Q 9. नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउण्टेनियरिंग कहाँ           स्थित है? (a) उत्तरकाशी (b) पणजी (c) देहरादून  (d) पुणे

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VOCABULARY for All Competitive Exams | शब्दावली |

VOCABULARY | शब्दावली |  All Competitive Exams1. MERE (ADJECTIVE): (एकमात्र): TriflingSynonyms: meagre, bareAntonyms: importantExample Sentence:Many questions cannot be answered by mere mortals.2. SPAWN (VERB):(उत्पन्न करना): Give rise toSynonyms: occasion, generateAntonyms: destroy, killExample Sentence:The decade spawned a bewildering variety of books on the forces.3. FOSTER (VERB):(प्रोत्साहन देना): EncourageSynonyms: promote, furtherAntonyms: neglectExample Sentence:The teacher’s task is to foster learning not fear.4. EXEMPTION (NOUN):(छूट): ConcessionSynonyms: exception, dispensationAntonyms: liabilityExample Sentence:Vehicles that qualify for exemption from tax would be sold out sooner.5. DISCRETIONARY (ADJECTIVE): (ऐच्छिक): optionalSynonyms: non-compulsory, voluntaryAntonyms: compulsoryExample Sentence:There has been an increase in year-end discretionary bonuses.6. CONTEMPT (NOUN):(अपमान): AbasementSynonyms: disdain, disrespectAntonyms: respectExample Sentence:He was meant to be punished for his contempt.7. COMBAT (NOUN): (युद्ध): battleSynonyms: fighting actionAntonyms: harmonyExample Sentence:They lost badly in a combat.8. PREJUDICED (ADJECTIVE): (पक्षपातपूर्ण): BiasedSynonyms: bigoted, discriminatoryAntonyms: unbiasedExample Sentence:People are prejudiced against us.9. ZEALOUS (ADJECTIVE): (उत्साही):  FerventSynonyms: ardent, fervidAntonyms: apatheticExample Sentence:I was extremely zealous to finally see him.10. EXPEDITE (VERB): (जल्दी करना):  Speed upSynonyms: accelerate, hurryAntonyms: delayExample Sentence:He promised to expedite economic reforms.👆👆SHARE & SUPPORT US👆👆

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इस तारीख को है MP TET 2020 की परीक्षा । Exam Date of MP-TET-2020 |

मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (PEB) ने प्राइमरी स्कूल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट-2020 (MP TET 2020) की तारीख जारी की दी है। बोर्ड की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक यह परीक्षा 19 सितंबर, 2020 से शुरू होंगी। हालांकि अभी बोर्ड की तरफ से एडमिट कार्ड जारी होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके बारे में ऑफिशियल वेबसाइट पर बाद में जानकारी घोषित कर दी जाएगी। इस बारे में बोर्ड ने  Official website MPTET पर नोटिफिकेशन जारी कर जानकारी दी है। MP TET 2020 के लिए जनवरी 2020 में ऑनलाइन आवेदन पत्र जारी किए थे, जिसकी परीक्षा 25 अप्रैल, 2020 को दो चरणों में होनी थी।    👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼Note👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼 Important Pedagogy Question for All TET Examination टीचर बनने के जरूरी MP TET प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश के स्कूलों में टीचर बनने के इच्छुक उम्मीदवार को MP TET प्रमाण पत्र हासिल करना होता है। इसके लिए हर साल लाखों उम्मीदवारों आवेदन करते हैं। प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए उम्मीवारों को पेपर एक का चुनाव करना होता है, जबकि 6वीं से 8वीं तक के स्टूडेंट्स को पढ़ाने की चाह रखने वाले कैंडिडेट्स को पेपर 2 की परीक्षा देनी होती है। आवेदक ध्यान दे कि उम्मीदवार का आधार रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है, वरना उम्मीदवार आवेदन करने में असमर्थ होंगे।परीक्षा पास करने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 60 अंक और आरक्षित वर्ग को 50 अंक लाने होंगे। वहीं, दिव्यांग आवेदकों की बात करें तो 50 अंक लाने जरूरी हैं। Updates on CTET Exam

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Important Pedagogy Questions | CTET Paper I and Paper II |

CTET में पूछे जाने वाले कुछ अति महत्वपूर्ण सवाल। Q 1.  निम्न में से किसने नैतिक वृद्धि की तीन                अवस्थाओं तथा छः चरणों की अवधारणा               प्रस्तुत की है?   (a) कोहलबर्ग ने   (b) पियाजे ने   (c) एरिकसन ने   (d) स्किनर ने Join Our Telegram Search on Telegram :- @EduCtet1 Q 2. विकास के मुख्य रूप कौन-से नहीं हैं? (a) शारीरिक विकास तथा मानसिक विकास (b) संवेगात्मक विकास तथा सामाजिक विकास (c) नैतिक विकास तथा चारित्रिक विकास (d) जनसंख्या विकास तथा भूमि विकास Join us @Facebook Q 3 . विकास की शैशवावस्था में सांवेगिक विकास            का अध्ययन किया जाता है :-        (a) साक्षात्कार से       (b) निरीक्षण से       (c) अनुसन्धान से       (d) वैज्ञानिक रूप से Question on Individual Difference 👆🏻 वैयक्तिक विभिन्नता के पूछे जाने वाले प्रश्न👆🏻 Q 4. पढ़ाते समय चित्र दिखाने में सबसे अधिक              महत्वपूर्ण लाभ कौन-सा है?       (a) इससे शिक्षक को कुछ समय के लिए राहत मिल              जाती है       (b) इससे पाठ को समझाने में सहायता मिलती       (c) विद्यार्थी चित्र देखने में रुचि रखते हैं       (d) इससे विद्यार्थियों का मनोरंजन होता है Q 5.  बालक के प्रारम्भिक सामाजिक विकास में               सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक होता है :-       (a) अपने ही लिंग के माता या पिता से लगाव       (b) घर का वातावरण       (c) बालक की अपने समूह एवं मित्र-मण्डली के                प्रति अभिवृत्तियाँ       (d) संवेगात्मक सुरक्षा की आंशिक योग्यता         हिंदी शिक्षण के महत्वपूर्ण प्रश्न 👆🏻 हिंदी शिक्षण के पूछे जाने वाले प्रश्न👆🏻 Q 6. अवचेतन मन का अध्ययन किया जाता है :-         (a) निरीक्षण द्वारा        (b) अन्तरंग विधियों द्वारा        (c) बहिरंग विधियों द्वारा        (d) मनोविश्लेषणात्मक विधियों द्वारा Q 7.  केस स्टडी विधि मुख्यतः प्रयुक्त होती है :-        (a) प्रयोगात्मक अध्ययन हेतु        (b) पिछड़े बालकों के अध्ययन हेतु        (c) सामाजिक सर्वेक्षण हेतु        (d) वैयक्तिक अध्ययन हेतु लॉरेंस-कोहलबर्ग-का-नैतिक-सिद्धान्त कोहलबर्ग के सिद्धान्त को ☝🏽 ☝🏽  यहां पढ़ें।  Answer 1 – a , 2 – d , 3 – b , 4 – b , 5 – a , 6 -a , 7 – d For More Updates JOIN Us        👇🏼👇🏼             👇🏼👇🏼  Facebook & Telegram        ☝🏽☝🏽           ☝🏽☝🏽

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CTET Admit Card 2020: एडम‍िट कार्ड को लेकर बड़ा अपडेट, जानें कब होगा जारी

CTET Admit Card 2020: एडम‍िट कार्ड को लेकर बड़ा अपडेट, जानें कब होगा जारी CBSE CTET Admit Card 2020: सीटीईटी परीक्षा 5 जुलाई को आयोज‍ित होने वाली है। CTET 2020 Admit Card Update:  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जल्द ही CTET एडमिट कार्ड 2020 जारी होने की उम्मीद की है। CTET परीक्षा 5 जुलाई 2020 को आयोजित होने वाली है और CBSE ने परीक्षा तिथि में कोई बदलाव नहीं किया है। उम्‍मीद की जा रही है क‍ि CBSE, जून 2020 के दूसरे सप्‍ताह में CTET July Admit Card जारी कर देगा। जिन उम्मीदवारों ने CTET जुलाई 2020 परीक्षा के लिए आवेदन किया है, उन्हें CTET परीक्षा के लिए उपस्थित होना होगा और इसके ल‍िये उन्‍हें एडमिट कार्ड की आवश्‍यकता होगी। एडमिट कार्ड या हॉल टिकट जारी होने के बाद, उम्मीदवारों को इसे डाउनलोड करने और प्रिंट आउट लेने का पर्याप्त समय दिया जाएगा। जून के दूसरे या तीसरे सप्‍ताह में CBSE के आध‍िकार‍िक वेबसाइट पर CTET Admit Card र‍िलीज कर सकता है। Join Our Facebook here Join FB page CTET Admit Card पर कौन से ड‍िटेल होंगे : CTET एडम‍िट कार्ड पर उम्‍मीदवार का नाम, रोल नंबर, परीक्षा की तारीख, परीक्षा का समय, परीक्षा केंद्र और उसका पता, र‍िपोर्ट‍िंग टाइम, उम्‍मीदवार का हस्‍ताक्षर, उम्‍मीदवार की फोटो, परीक्षा के द‍िन के ल‍िये न‍िर्देश और अन्‍य। IMPORTANT Topic :- project method of teaching CTET एडम‍िट में कुछ गड़बड़ी हो तो क्‍या करें: अगर आपके CTET एडम‍िट कार्ड में दी गई जानकारी गलत है तो आप इसके ल‍िये CBSE या नेशनल टेस्‍ट‍िंग एजेंसी को संपर्क कर सकते हैं। ईमेल ID: directorctet@gmail.com टेलीफोन : 011 – 22240112               011 – 22235774 CTET Admit Card 2020: ऐसे करें डाउनलोड स्‍टेप 1: आध‍िकार‍िक वेबसाइट www.ctet.nic.in पर जाएं। स्‍टेप 2: एडम‍िट कार्ड के ल‍िये द‍िये गए ल‍िंक पर क्‍ल‍िक करें। स्‍टेप 3: CTET रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्‍म त‍िथ‍ि एंटर करें। स्‍टेप 4: एडम‍िट कार्ड स्‍क्रीन पर आ जाएगा। सीटीईटी (CTET) की परीक्षा दो पाली में होती है पहली पाली नौ बजकर तीस मिनट से शुरू होकर 12 बजे तक और दूसरी पाली 2 बजे से लेकर 2: 30 मिनट तक की होती है. इस बार सीबीएससी सीटीईटी की परीक्षा का 14वां संस्करण आयोजित कराएगा। Ctet की परीक्षा प्राथमिक स्तर और उच्च दो स्तरों में आयोजित कराई जाती है। Important Question for CTET2020 परीक्षा में शाम‍िल होने के ल‍िये इन बातों का रखें ध्‍यान: 1. उम्‍मीदवार को मास्क लगाना अनिवार्य होगा। मास्क लगाकर ही परीक्षा हॉल में प्रवेश प्राप्‍त कर पाएंगे उम्‍मीदवार। 2. परीक्षा शुरू होने से डेढ घंटे पहले एग्‍जाम सेंटर पहुंचना होगा। 3. परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले उम्‍मीदवारों को सेनेटाइटर का इस्‍तेमाल करना होगा। इसकी व्‍यवस्‍था परीक्षा केंद्र पर होगी। 4. एक परीक्षा कक्ष में 12 से 20 छात्र ही होंगे और उनके बीच कम से कम 6 फीट की दूरी होनी आवश्यक है। 5. एडमिट कार्ड को ट्रांसपैरेंट थैली में लाना होगा जरूरी।

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